धान में सागरिका का उपयोग: डोज़, समय और फायदे

धान में सागरिका का उपयोग: डोज़, समय और फायदे

संक्षिप्त सारांश

  • धान में सागरिका लिक्विड की सामान्य डोज़ प्रति एकड़ दो सौ पचास से पांच सौ मिलीलीटर, यानी प्रति लीटर पानी में दो दशमलव पांच से पांच मिलीलीटर है।
  • तीन स्प्रे का तरीका सबसे अच्छा नतीजा देता है, पहला रोपाई के बाद टिलरिंग अवस्था में, दूसरा बाली निकलने से पहले, तीसरा फूल आने के बाद।
  • सागरिका धान की जड़ों को मजबूत करती है, कल्लों की संख्या बढ़ाती है और दाने की क्वालिटी सुधारती है।
  • यह NPOP सर्टिफाइड ऑर्गेनिक उत्पाद है और धान की सामान्य NPK खाद के साथ भी इस्तेमाल की जा सकती है।
  • पूरी जानकारी और खरीदारी के लिए सागरिका लिक्विड यहां देखें।

धान की फसल में सागरिका क्यों इस्तेमाल करें

धान भारत की सबसे बड़ी फसलों में से एक है, और इसकी जड़ें पानी से भरे खेत में लगातार तनाव में रहती हैं। सागरिका एक समुद्री शैवाल आधारित जैविक बायोस्टिमुलेंट है, जो धान को यह तनाव सहने में मदद करती है और पौधे को दिए गए पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करने में मदद करती है।

सागरिका धान की मुख्य NPK खाद की जगह नहीं लेती। यह उसके साथ मिलकर काम करती है, जिससे फसल को दिया गया नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश ज्यादा असरदार तरीके से इस्तेमाल होता है।

धान में सागरिका की सही डोज़

सागरिका लिक्विड को धान में छिड़काव के लिए प्रति एकड़ दो सौ पचास से पांच सौ मिलीलीटर की दर से इस्तेमाल किया जाता है। पानी में मिलाते समय यह मात्रा दो दशमलव पांच से पांच मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के बराबर होती है।

बीज या पनीरी उपचार के लिए एक हल्की मात्रा इस्तेमाल होती है, जो एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के बराबर है। रोपाई से पहले पनीरी की जड़ों को इस घोल में थोड़ी देर डुबोया जाता है, जिससे रोपाई के झटके को कम किया जा सकता है।

सागरिका ग्रेन्यूल्स को मिट्टी में प्रति एकड़ दस किलोग्राम की दर से समान रूप से फैलाया जाता है।

धान में सागरिका स्प्रे करने का सही समय

सबसे अच्छे नतीजे के लिए सागरिका को धान की तीन मुख्य अवस्थाओं पर स्प्रे किया जाता है।

पहला स्प्रे, टिलरिंग अवस्था पर। यह रोपाई के पच्चीस से तीस दिन बाद आता है। इस समय स्प्रे करने से जड़ों की बढ़त और कल्लों की संख्या बढ़ती है।

दूसरा स्प्रे, बाली निकलने से पहले। यह रोपाई के पचपन से साठ दिन बाद आता है। इस समय का स्प्रे पौधे को फूल आने के लिए तैयार करता है और यह सबसे ज्यादा असर वाला स्प्रे माना जाता है।

तीसरा स्प्रे, फूल आने के बाद। यह दाने भरने की अवस्था में किया जाता है, जो दाने की गुणवत्ता और वजन सुधारने में मदद करता है।

कम से कम दो स्प्रे करना जरूरी है, जिसमें दूसरा स्प्रे बाली निकलने से पहले वाला होना चाहिए। स्प्रे हमेशा सुबह के समय करें, जब पत्तों पर जमी ओस सूख गई हो, ताकि पौधा दवा को बेहतर तरीके से सोख सके।

सागरिका के साथ धान की सामान्य NPK खाद

सागरिका किसी भी तरह से धान की सामान्य खाद की जगह नहीं लेती। ICAR के मार्गदर्शन के अनुसार, सिंचित खरीफ धान में सामान्य NPK डोज़ प्रति हेक्टेयर साठ किलोग्राम नाइट्रोजन, तीस किलोग्राम फॉस्फोरस और तीस किलोग्राम पोटाश के आसपास होती है। यह मात्रा क्षेत्र और मिट्टी के हिसाब से बदल सकती है, इसलिए हमेशा स्थानीय कृषि विभाग से सही सलाह लें।

नाइट्रोजन को आमतौर पर दो या तीन हिस्सों में बांटकर दिया जाता है, आधार खाद के रूप में, टिलरिंग के समय और बाली निकलने के समय। सागरिका का स्प्रे इन्हीं अवस्थाओं के साथ मिलाकर किया जा सकता है, जिससे दी गई खाद का असर बेहतर होता है।

धान में सागरिका इस्तेमाल करने के फायदे

जड़ों की बढ़त में सुधार। सागरिका धान की जड़ों को मजबूत बनाती है, जिससे पौधा पानी और पोषक तत्व बेहतर तरीके से खींच पाता है।

ज्यादा कल्ले बनना। टिलरिंग अवस्था पर स्प्रे करने से पौधे में कल्लों की संख्या बढ़ती है, जिससे बालियों की संख्या भी बढ़ती है।

तनाव सहने की क्षमता। गर्मी, सूखे और खारी मिट्टी जैसे तनाव को सहने की ताकत बढ़ती है, जो असमान बारिश वाले क्षेत्रों में खास तौर पर फायदेमंद है।

दाने की क्वालिटी और वजन में सुधार। फूल आने के बाद का स्प्रे दाना भरने की प्रक्रिया को सहारा देता है, जिससे दाने का वजन और क्वालिटी दोनों सुधरते हैं।

कुल उपज में बढ़ोतरी। ऊपर बताए सभी फायदों के मिलने से फसल की कुल उपज में सुधार देखा जाता है।

धान में सागरिका इस्तेमाल करते समय ध्यान रखने वाली बातें

जिंक की कमी वाली मिट्टी में, रोपाई से पहले जिंक सल्फेट की आधार खुराक देना जरूरी है, क्योंकि पानी से भरे खेत में जिंक की कमी आम समस्या है। सागरिका इस कमी को पूरा नहीं करती।

पूरी नाइट्रोजन खाद एक साथ न डालें, क्योंकि इससे खाद बेकार जाती है और धान को उसकी जरूरत के समय पोषण नहीं मिलता।

बाली निकलने वाली अवस्था का स्प्रे कभी न छोड़ें, क्योंकि यह अंतिम उपज के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

धान में सागरिका की सही डोज़ क्या है

धान में सागरिका लिक्विड की डोज़ प्रति एकड़ दो सौ पचास से पांच सौ मिलीलीटर है, यानी प्रति लीटर पानी में दो दशमलव पांच से पांच मिलीलीटर।

धान में सागरिका कब स्प्रे करें

तीन बार स्प्रे करना सबसे अच्छा रहता है, टिलरिंग अवस्था पर, बाली निकलने से पहले, और फूल आने के बाद। कम से कम दो स्प्रे जरूरी हैं।

क्या सागरिका धान की NPK खाद की जगह ले सकती है

नहीं। सागरिका NPK खाद की जगह नहीं लेती। यह खाद के साथ मिलकर काम करती है और पौधे को दिए गए पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करने में मदद करती है।

धान में सागरिका इस्तेमाल करने से क्या फायदा होता है

इससे जड़ों की बढ़त बेहतर होती है, कल्लों की संख्या बढ़ती है, तनाव सहने की क्षमता बढ़ती है और दाने की क्वालिटी और उपज में सुधार होता है।

पनीरी की रोपाई से पहले सागरिका कैसे इस्तेमाल करें

पनीरी की जड़ों को एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हल्के घोल में थोड़ी देर डुबोया जाता है, जिससे रोपाई के झटके को कम किया जा सकता है।

क्या सागरिका को कीटनाशक के साथ मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है

हां, ज्यादातर कीटनाशक और फफूंदनाशक दवाओं के साथ सागरिका को मिलाया जा सकता है। बड़ी मात्रा में मिलाने से पहले एक छोटा जार टेस्ट कर लेना बेहतर रहता है।

धान में स्प्रे का सही समय दिन में कब होता है

सुबह के समय, जब पत्तों पर जमी ओस सूख गई हो। इस समय पौधा दवा को बेहतर तरीके से सोख पाता है।

क्या सागरिका जिंक की कमी पूरी करती है

नहीं। जिंक की कमी वाली मिट्टी में अलग से जिंक सल्फेट की आधार खुराक देनी चाहिए। सागरिका इसकी जगह नहीं ले सकती।

क्या सागरिका ऑर्गेनिक खेती के लिए सही है

हां। सागरिका NPOP सर्टिफाइड ऑर्गेनिक उत्पाद है, इसलिए यह ऑर्गेनिक और सामान्य दोनों तरह की धान की खेती में इस्तेमाल की जा सकती है।

धान में सागरिका ग्रेन्यूल्स की डोज़ क्या है

सागरिका ग्रेन्यूल्स को प्रति एकड़ दस किलोग्राम की दर से मिट्टी में समान रूप से फैलाया जाता है।

निष्कर्ष

धान में सागरिका का सही इस्तेमाल सही डोज़ और सही समय पर टिकता है। लिक्विड को दो सौ पचास से पांच सौ मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से, टिलरिंग, बाली निकलने से पहले और फूल आने के बाद के तीन चरणों में स्प्रे करना सबसे अच्छा नतीजा देता है। यह धान की सामान्य NPK खाद की जगह नहीं लेती, बल्कि उसके साथ मिलकर जड़ों, तनाव सहने की क्षमता और दाने की क्वालिटी को बेहतर बनाती है। पूरी प्रोडक्ट जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

 

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